ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनाई नें तेहरान में होने वाली इक्कीसवें नमाज़ सम्मेलन के नाम अपने एक संदेश में, एक आदर्श इस्लामी समाज के लिये नमाज़ को उसका सही स्थान दिये जाने को आवश्यक जानते हुए कहा- सारी सांस्कृतिक, कलात्मक और शैक्षिक प्रोग्रामिंग लोगों के बीच आये दिन बढ़ती हुई नमाज़ की रौनक़ के उद्देश्य के साथ हो।
सुप्रीम लीडर का भेजा हुआ संदेश इस प्रकार है।
बिसमिल्लाहिर् रहमानिर् रहीम
इस वर्ष भी आप सभी अल्लाह वालों और वास्तविकता को पसंद करने वाले पुरूषों और महिलाओं ने यह सम्मेलन आयोजित करके अपनी बड़ी कर्तव्य अर्थात नमाज़ को क़ाएम करने की तरफ़ बड़ा क़दम उठाया है। इस सम्मेलन के सभी ज़िम्मेदारों और विशेष कर जनाब हुज्जतुल इस्लाम क़राती का जो एक अनथक, सच्चे, दृढ़ निश्चय वाले इंसान और इस बड़े काम के वास्तविक ज़िम्मेदार हैं, आभार व्यक्त करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि अल्लाह उन्हें व उनके साथियों को इसका अच्छा बदला दे।
(नमाज़ के बारे में होने वाले) इन तमाम कामों के बावुजूद हमें स्वीकार करना चाहिये कि इस इस्लामी देश के हम ज़िम्मेदारों ने नमाज़ के बारे में अपने कर्तव्य को पूरी तरह से नहीं निभाया है। नमाज़ की महत्व को सही समझने की आवश्यकता है यह जो कहते हैं कि, अगर अल्लाह ने नमाज़ को स्वीकार कर लिया तो बाक़ी सारे काम और इबादतें भी स्वीकार कर ली जाती हैं और अगर नमाज़ को नकार दिया गया तो हमारा कोई भी कार्य स्वीकार नहीं हो सकता। इससे हमें एक बड़ी हक़ीक़त का पता चलता है और वह यह है कि अगर इस्लामी समाज में नमाज़ को उसका सही स्थान मिल जाए तो (समाज में होने वाली) सारे भौतिक व आध्यात्मिक प्रयास भी अपने सही रास्ते पर आ जाएंगे और समाज को एक इस्लामी आदर्श समाज का रूप दे देंगे और अगर नमाज़ के महत्व को भुला दिया जाए और नमाज़ की तरफ़ ध्यान न दिया जाए तो फिर यह रास्ता सही तरीक़े से तय नहीं किया जा सकता और उस चोटी तक पहुँचने के लिये जहाँ इस्लाम मानवता को पहुँचाना चाहता है, हमारी सारे प्रयास और परिश्रम नाकाम हो जाएंगे।
यह तथ्य हम सबके लिये एक चेतावनी है और एक बड़े कर्तव्य की याद दिलाता है। हमारी सारी सांस्कृतिक, कलात्मक और शैक्षिक प्रोग्रामिंग इस तरह से हो जिससे नमाज़ को अपनी सही हालत के साथ लोगों और विशेष कर नौजवानों और जवानों के बीच रौनक़ मिल जाए और सबके सब पवित्रता और रौशनी के इस स्रोत से लाभ उठाएं।
इसमें संदेह नहीं कि सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्र टी.वी., रेडियो सेंटर (मीडिया) और साथ ही मस्जिदों के ज़िम्मेदार लोगों को दूसरों से कहीं ज़्यादा अपने इस कर्तव्य को समझना चाहिए।
अल्लाह से मदद मांगे और इस काम के लिये अपनी कमर बांध लें और एक नई मुहिम की शुरूआत करें।
अल्लाह आपका सहायक व मददगार है।
सय्यद अली ख़ामेनई
2-09-2012
........
166